प्रिय छात्रों और सदस्यों,
नमस्कार!
शिक्षक का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है वह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को बौद्धिक परम्पराएँ तथा तकनीकी कौशल पहुंचाने का केंद्र है और सभ्यता के प्रकाश को प्रज्वलित रखने में सहायता देता है।
आज मल्टी डिसीप्लिनरी एप्रोच का तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का समय है, सिंगल नॉलेज नहीं, सभी क्षेत्रों में नॉलेज हो, ऐसी शिक्षा हो जो कौशल को विकसित कर सके जो आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बना सके। वह जीवन की चुनौतियों से स्वयं निपट सके, आधुनिक युग में उच्च गुणवत्ता युक्त विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा ही देश को विकसित देशों की श्रेणी में ला खड़ा करने में सक्षम है।
आज विद्यार्थियों में दृढ़ आत्मविश्वास तथा कुछ करने का जज्बा हो तो चाहे बरसते बादल हो, तपती धूप हो, उफनती नदियां हो या चाहे कांटों भरी राह ही क्यों ना हो, वह अपनी मंजिल की प्राप्ति शत प्रतिशत कर ही लेता है।
आज विद्यार्थियों के सामने यदि अपना लक्ष्य है तो उसे पूर्ण करने के लिए महाविद्यालय के प्राचार्य एवं समस्त व्याख्यातागणों की भी महत्ती भूमिका रहती है। शिक्षक ही हमारे जीवन और वातावरण में सामंजस्य स्थापित कर सच्ची शिक्षा दे सकता है। महाविद्यालय तथा विद्यालय शैक्षिक प्रक्रिया की एक आधारभूत संगठनात्मक इकाई है और संस्था प्रधान उसका केंद्र बिंदु।
संस्था प्रधान अपने प्रबंध कौशल, उच्च चरित्र, प्रभावी व्यक्तित्व, अनुशासन प्रियता एवं उदारता, सहनशीलता, भावात्मक संतुलन, वाक् चातुर्य, उच्च कल्पना शक्ति, उच्च सहानुभूति, पूर्ण व्यवहार, आशावादी दृष्टिकोण, लोकतंत्रात्मक भावना, आत्मविश्वास व सामाजिकता आदि गुणों द्वारा सभी को प्रभावित कर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाते हैं। इसीलिए कहा गया है कि तुम शक्ति हो, तुम ज्ञान हो, तुम ही संस्कारों की खान हो। क्रांति के अग्रदूत, गौरव के तुम सार, संस्था प्रधान तुम चेतना के आह्वान हो।
शिक्षक एवं संस्था प्रधान ही विद्यार्थियों में सकारात्मक ऊर्जा, दृढ़ निश्चय और कड़ी मेहनत द्वारा मंजिल तक पहुंचाने में सहायक होते हैं। यदि हमारी बुद्धि जाग्रत है, मन व इंद्रियां अनुशासित व संयमित है तो जीवन का कोई भी लक्ष्य असाध्य नहीं हो सकता।
धनुष से जो छूटता है बाण, कब मग में ठहरता, देखते ही देखते वह लक्ष्य का ही वेध करता। लक्ष्य प्रेरित बाण हूं मैं, ठहरने का काम कैसा, लक्ष्य तक पहुंचे बिना, पथ में पथिक विश्राम कैसा।
आपको आशावादी होना चाहिए, जैसे सूर्य ढलता है, अस्त होता है मगर गायब नहीं होता, वह अगले दिन फिर नई रश्मियों के साथ उदय होता है, नई भोर होती है, नई ऊर्जा होती है — ठीक उसी तरह मन में आशाएं होनी चाहिए।
मुश्किलें दिलों के इरादे आजमाती है, स्वप्न के पर्दे निगाहों से हटाती है। हौसला मत हार गिरकर ओ मुसाफिर, ठोकरें इंसान को चलना सिखाती है।
दृढ़ निश्चय है तो मंजिल पावों में आएगी, जिंदगी खिले फूल सी सदा मुस्कुराएगी। कर्तव्य पर चलते हुए सिर उठाये रखो तुम, दुनिया तुम्हारे चरणों में सिर को झुकाएगी।
जिस प्रकार प्रत्यूष में सूर्य देव की राशियों की प्रथम किरण के रूप में जो पूर्ण दिवस में उत्तरोत्तर प्रगति की ओर अग्रसर होता है, ठीक उसी प्रकार चाणक्य शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय भी नव ऊर्जा के लिए अपने प्रशिक्षणार्थियों को सफलता का शिखर छूने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ होकर पावरप्वाइंट प्रस्तुति द्वारा एवं Learning by Doing का ज्ञान प्रदान करता है।
